मुंबईः महाराष्ट्र के मंत्री और NCP नेता हसन मुश्रीफ और उनके बेटों के खिलाफ 2022 में दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग मामला अब बंद हो गया है। ईडी की तरफ से फाइल क्लोज़र रिपोर्ट (मामला बंद करने की रिपोर्ट) को स्वीकार कर लिया है। अदालत ने यह फैसला इससे जुड़े मूल अपराधों के रद्द होने के आधार पर लिया है।
मनी लॉन्ड्रिंग की यह जांच मार्च 2022 में पुणे के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (RoC) द्वारा कंपनी अधिनियम के कथित उल्लंघन को लेकर दर्ज कराई गई एक शिकायत से शुरू हुई थी। इसके बाद, फरवरी 2023 में कोल्हापुर के मुर्गूड पुलिस स्टेशन में एक FIR दर्ज की गई थी, जिसमें किसानों से जुटाई गई शेयर पूंजी में धोखाधड़ी और हेरफेर का आरोप लगाया गया था। हालांकि, 2025 में बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुर्गूड पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले को रद्द कर दिया था।
ईडी ने कोर्ट को दी ये जानकारी
जांच को बंद करने का अनुरोध करते हुए ईडी ने विशेष अदालत को बताया कि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत कार्यवाही शुरू करने के लिए 'मूल अपराध' (scheduled offence) का होना एक अनिवार्य शर्त है। इसलिए हाई कोर्ट के आदेश के बाद मनी लॉन्ड्रिंग की शिकायत में अब कुछ भी शेष नहीं रह गया है।
मंगलवार को पारित अपने आदेश में विशेष PMLA न्यायाधीश एस. वी. सहारे ने कहा, "चूंकि मूल अपराध (predicate offence) को रद्द कर दिया गया है। इसलिए PMLA के तहत अपराध भी अब कायम नहीं रहता। इस आदेश का विवरण गुरुवार को सामने आया। ईडी के अनुरोध को मानते हुए विशेष अदालत ने 4 अप्रैल 2022 की 'एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट' (ECIR) को बंद कर दिया और निर्देश दिया कि मामले से जुड़े दस्तावेज ईडी अधिकारियों को वापस कर दिए जाएं।
हसन मुश्रीफ पर क्या आरोप था
ईडी का आरोप था कि 2013-2014 के दौरान एक शुगर फैक्ट्री को कई 'शेल' (फर्जी) कंपनियों से करोड़ों रुपये मिले थे। इनमें कोलकाता स्थित और बंद हो चुकी (struck-off) कंपनियां भी शामिल थीं, जिनसे यह रकम इक्विटी और प्रेफरेंस शेयर सब्सक्रिप्शन के नाम पर ली गई थी। ईडी का दावा था कि वित्तीय विवरणों में 11.35 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश दिखाए गए, जिनका कोई बैंक ट्रेल (लेन-देन का रिकॉर्ड) नहीं था। इसके अलावा सर्कुलर ट्रांजैक्शन और नकद जमा के जरिए बड़ी रकम को फैक्ट्री, उससे जुड़े निदेशकों के खातों में भेजा गया।
जांच एजेंसी ने 2023 की शुरुआत में कई जगहों पर तलाशी ली थी। जुलाई 2024 में, एजेंसी ने 2.07 करोड़ रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट रसीदें (FDR) और 7.70 लाख रुपये नकद को अस्थायी रूप से जब्त (अटैच) कर लिया। बाद में दिसंबर 2024 में नई दिल्ली स्थित 'एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी' ने इस जब्ती की पुष्टि कर दी। हालांकि, आरोपियों ने दो 'प्रेडिकेट केस' (मूल मामलों) को चुनौती देते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जून 2025 में, हाई कोर्ट ने FIR को रद्द करने की याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने पाया कि जांच अधिकारी पहले ही स्थानीय अदालत में एक 'C-समरी' रिपोर्ट (जिसमें मामला न तो सही माना जाता है और न ही गलत) दाखिल कर चुके थे, जिसे अदालत ने स्वीकार भी कर लिया था। इसके बाद पिछले साल 6 नवंबर को हाई कोर्ट ने RoC (रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज) की शिकायत पर पुणे की एक अदालत द्वारा जारी की गई कानूनी प्रक्रिया को रद्द कर दिया।
(पीटीआई इनपुट के साथ)
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